दिल्ली। भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो वैश्विक खपत का लगभग 27 परसेंट है। भारत बड़े पैमाने पर दहलन वाली फसलों का आयात भी करता है। इनमें अमेरिका से लेकर रूस, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार जैसे कई देश हैं।
भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन देशों से मटर, मूंग, अरहर, मसूर का आयात करता है। हाल ही में अमेरिका के लगाए गए टैरिफ के जवाब मे भारत ने अमेरिकी दालों पर 30 परसेंट टैरिफ लगा दिया।
अब चूंकि, कृषि उत्पादों और वह भी खासकर दालों के लिए भारत एक बड़ा बाजार है इसलिए अमेरिका को भारत का उठाया गया यह कदम रास नहीं आया। इसे लेकर मोंटाना के रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के केविन क्रेमर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चिट्ठी भी लिखी थी। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दलहन फसलों पर टैरिफ को लेकर बात करने और इसे कम करने के लिए कहा था। अब इसी सिलसिले में रविवार को नई दिल्ली में अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और इसके रणनीतिक महत्व पर चर्चा की।
बता दें कि 16 जनवरी को अपने लिखे पत्र में दोनों रिपब्लिकन सीनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रंप से बताया कि मोंटाना और नॉर्थ डकोटा अमेरिका में दलहन फसलों के शीर्ष उत्पादक हैं। ऐसे में भारत के लगाए गए टैरिफ से उनके किसानों को नुकसान पहुंच रहा है। भारत ने 1 नवंबर से अमेरिका के पीले मटर पर 30 परसेंट टैरिफ लगाया था। इसके चलते अमेरिकी दलहन उत्पादकों को भारत में अपने हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करते समय एक बड़ी कॉम्पिटिटिव नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। दोनों ने ट्रंप प्रशासन से भारत के साथ ट्रेड डील पर बातचीत के दौरान इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया था।









