ढाका। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर लगाम नहीं लग रहा है। हाल ही में एक और हिंदू लड़के पर कट्टरपंथी जानवर बनकर टूट पड़े हैं। पहले उसे पीट-पीट कर अधमरा किया गया और फिर उसे जहर पिलाकर जान ले ली गई। इस लड़के की पहचान जॉय महापात्र के तौर पर हुई है, जिसका शव कट्टरपंथियों ने पहचानने लायक भी नहीं छोड़ा था।हिंदुओं की हत्या ये पैटर्न 13वें संसदीय चुनावों के ऐलान के बाद दोबारा शुरू हुआ था। जिसका तमाशा यूनुस इस तरह चैन से बैठकर देख रहे हैं, जैसे उन पर कोई आंच नहीं आने वाली।
नया मामला सुनामगंज जिले के भांगडोहार गांव का है, जहां पर जॉय महापात्र को कट्टरपंथियों की भीड़ ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। उसे लहुलुहान करने के बाद भी जी नहीं भरा तो उग्रवादियों ने उसे जहर पिला दिया। जानवरों की भीड़ ने जॉय को बिना किसी जुर्म के धीमी और दर्दनाक मौत दी।अपने बेटे की ऐसी हालत देखकर परिवार अथाह दर्द में है। जॉय की फैमिली ने अमीरुल इस्लाम नाम के शख्स पर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अमीरुल ने पहले जॉय की बेरहमी से पिटाई की और फिर उसे जहर दे दिया। यह हत्या पिछले 20 दिनों में हुई हिंदू युवाओं की हत्याओं की कड़ी में एक और नाम है।
‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ के आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर का महीना अल्पसंख्यकों के लिए काल बना। जब कम से कम 51 हिंसक वारदातें दर्ज की गईं और 10 से ज्यादा हिंदुओं की हत्याओं की खबर है। 10 चोरी-डकैती, 23 संपत्तियों पर अवैध कब्जे और लूटपाट की घटनाएं हुई हैं। पिछले कुछ दिनों में कई और हिंदू युवाओं और व्यापारियों को निशाना बनाया गया है जनवरी का महीना भी खौफनाक हत्याओं के साथ शुरू हुआ।
खोखन चंद्र दास (शरीयतपुर): 3 जनवरी 2026 को इनकी मौत हो गई। इन्हें पीटा गया, काटा गया और फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था।
राणा प्रताप बैरागी (जशोर): 5 जनवरी को इस हिंदू पत्रकार और फैक्ट्री मालिक की सरेआम सिर में गोली मारकर और गला रेतकर हत्या कर दी गई।
मणि चक्रवर्ती (नरसिंगदी): इसी सप्ताह एक किराने की दुकान चलाने वाले मणि की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई।
मिथुन सरकार (नौगांव): भीड़ द्वारा चोरी का आरोप लगाकर पीछा किए जाने के दौरान पानी में डूबने से इनकी मौत हो गई।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन घटनाओं पर गहरी नाराजगी जताई है। 9 जनवरी 2026 को प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ‘हम बांग्लादेश में चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों, उनके घरों और व्यवसायों पर लगातार हो रहे हमलों का एक परेशान करने वाला पैटर्न देख रहे हैं। इन घटनाओं को ‘व्यक्तिगत विवाद’ बताकर खारिज करना अपराधियों के हौसले बुलंद करता है’।










