हल्द्वानी। बुधवार को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी जी ने अल्मोड़ा निवासी डॉ. ललित मोहन जोशी की होली पुस्तक बरसत रंग फुहार का विमोचन किया।
इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास सराहनीय है। होली के अवसर पर यह पुस्तक सभी के लिए उपोयोगी साबित होगी।
इस पुस्तक में 100 होलियों को संग्रहित किया गया है। सभी होलियां पारंपरिक रूप से गायी जाती रही हैं, लेकिन होली गीत के पदों में शब्द की अशुद्धता को ठीक करने के प्रयास के साथ लुप्त हुए पदों को भी खोजकर लाने की कोशिश लेखक द्वारा की गई है।
इस पुस्तक के लेखक डॉ. ललित मोहन जोशी ने बताया कि गीतो को अपभ्रंश शब्दों को भी उसके मौलिक शब्दों से जोड़ा गयाहै। इस होली पुस्तक में ब्रज की होली को भी कुमांऊनी भावों के साथ पिरोया गयाहै।
लेखक ने इस पुस्तक को महिला होल्यारों को समर्पित किया है, उनका कहना है कि घर घर बैठकी होली करनी वाली महिलाओं के लिए यह किताब कारगर साबित होगी साथ ही महिलाएं ही इन अपभ्रंश हुए शब्दों को ठीक से गा सकती हैं और लुप्त हुए पदों अंतरों को भी जीवित रखने में इन्हीं महिला बैठक होलियों की बड़ी भूमिका हो सकती है।
विश्वविद्याल के कुलपति ने कहा कि बंसत पंचमी से होली की शुरुआत हो चुकी है ऐसे वक्त में इस पुस्तक का आना सभी होल्यारों के लिए सहायक बनेगा होली गीतों की शुद्धता का बचे रहना भी जरूरी है।








