जनसंख्या विस्फोट से लोकतंत्र को खतरा : उपराष्ट्रपति धनखड़

संपादक – तनुजा। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को एनआईटी रायपुर, आईआईटी भिलाई, और आईआईएम रायपुर के छात्रों से ‘बेहतर भारत बनाने के विचार’ विषय पर बात की। इस दौरान उन्होंने देश के तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

धनखड़ ने कहा, अवैध प्रवास की समस्या अब अराजकता के रूप में सामने आ रही है। ये हमारे चुनावी तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जनसंख्या विस्फोट और धर्म परिवर्तन की योजनाबद्ध कोशिशें गंभीर खतरे के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि यूसीसी को लागू किया जाना चाहिए। देश को गुणवत्ता वाले राजनीतिज्ञों की आवश्यकता है। जो लोग सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करते हैं, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आइए जानते हैं उपराष्ट्रपति ने देश के किस मु्द्दे पर क्या बात कही।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, हम इस देश में अवैध प्रवासन से पीड़ित हैं, जो लाखों की संख्या में है। अवैध प्रवासन अब एक नासूर बन चुका है। कोई भी देश लाखों अवैध प्रवासियों को सहन नहीं कर सकता। जब लोग छोटी-छोटी राजनीति में सोचते हैं तो हमें हमेशा राष्ट्र को पहले रखना चाहिए। देश में अवैध प्रवासी का कोई औचित्य नहीं हो सकता। ये हमारे संसाधनों, रोजगार, स्वास्थ्य क्षेत्र, और शिक्षा क्षेत्र पर दबाव डालते हैं। अवैध प्रवासियों की इस समस्या का समाधान में अब और देर नहीं की जा सकती। हर बीतता दिन इसे और जटिल बना रहा है। हमें इससे निपटने की जरूरत है।

एक छात्र के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, देश को गुणवत्ता वाले राजनीतिज्ञों की जरूरत है। हमारे युवाओं को इस बात को लेकर चिंतित होना चाहिए कि जब सार्वजनिक प्रतिनिधि अपना काम नहीं कर रहे। वो संवाद और विचार-विमर्श के बजाय उथल-पुथल में लिप्त हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वो सोशल मीडिया और अन्य मंचों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाएं ताकि वो अपना कर्तव्य निभाएं।

जनसंख्या विस्फोट और योजनाबद्ध धर्मांतरण को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, देश के लिए जनसंख्या विस्फोट एक गंभीर खतरे के रूप में उभर रहा है। अगर जनसंख्या विस्फोट केवल लोकतंत्र को अस्थिर करने के लिए हो तो यह एक चिंता का विषय बन जाता है। फिर धर्मांतरण की योजनाबद्ध कोशिशें होती हैं, जो प्रलोभन से देश की जनसंख्या को बदलने का उद्देश्य रखती हैं।

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड हमारे संविधान के निर्देशात्मक सिद्धांतों में है। शासन पर यह दायित्व डाला गया है कि कानून लाए, यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करें। उत्तराखंड ने इसे लागू किया है। हम संविधान में लिखी किसी चीज का विरोध कैसे कर सकते हैं? जो हमारे संविधान का हिस्सा है? हमें अपने लोगों के लिए कुछ लक्ष्य भी समझने होंगे, जिसमें से एक है यूनिफॉर्म सिविल कोड।

धनखड़ ने कहा, एक और चिंता का विषय यह है कि अब यह फैशन बन गया है कि हर संस्था या व्यक्ति दूसरे की सलाह देने लगे कि उसे अपने कार्य कैसे संभालने चाहिए। यह संवैधानिक कार्यप्रणाली के खिलाफ है। संविधान ने प्रत्येक संस्था के लिए एक विशिष्ट भूमिका निर्धारित की है, जो लोग विधायिका में हैं, वो न्यायपालिका को यह नहीं बता सकते कि कैसे निर्णय लिखें। देश की सेवा का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हर संस्था अपने निर्धारित कार्य करे।

उपराष्ट्रपति ने कहा, देश ने हमें संविधान दिया है। हमारी संप्रभुता अडिग है। कार्यकारी कार्यों को किसी अन्य संस्था को सौंपा नहीं जा सकता और न ही यह स्वीकार किया जा सकता है कि कार्यकारी कार्यों को कोई अन्य संस्था संभाले। कार्यपालिका केवल सरकार के पास होती है। अगर कार्यकारी कार्यों को कोई अन्य संस्था करती है तो यह संवैधानिकता के खिलाफ है। यह देश के लिए ठीक नहीं है।

राजनीतिक सहमति और संवाद की जरूरत पर धनखड़ ने कहा, हमें राजनीतिक दलों के बीच सार्थक संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान निकालने की आवश्यकता है। कई राजनीतिक दल होंगे, उनकी अलग-अलग विचारधाराएं होंगी। सफलता के रास्ते पर उनके अलग-अलग दृष्टिकोण होंगे लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर एकजुटता और सहमति की आवश्यकता है।

जनता की संपत्ति के नष्ट होने और सार्वजनिक व्यवस्था को चुनौती देने को लेकर धनखड़ ने कहा, 1.4 बिलियन की आबादी वाले देश में जहां हम ऐसी सभ्यता के साथ जीवन जीते हैं, कुछ लोग सार्वजनिक व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं? जो लोग सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करते हैं, उन्हें हम कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? हम ऐसे उपद्रव और ऐसे तत्वों को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं? इन पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। इन्हें वित्तीय रूप से जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

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