शेयर बाजार में इन दिनों कमोडिटी स्टॉक्स, खासकर मेटल सेक्टर में जबरदस्त हलचल मची हुई है। अगर आप बाजार की चाल पर नजर रखते हैं, तो आपने देखा होगा कि तांबे (Copper) की कीमतों में आया हालिया उछाल चर्चा का विषय बना हुआ है।
बात सिर्फ कीमतों की नहीं है, बल्कि भविष्य की उस मांग की है जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और डेटा सेंटर्स जैसे आधुनिक सेक्टर्स से निकल रही है। जनवरी 2026 में तांबे की कीमतें लगभग 13,000 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर को छू गई, जो वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत से करीब 40 फीसदी की भारी बढ़त थी। भले ही जनवरी के अंत में इसमें थोड़ी नरमी देखी गई, लेकिन बाजार में अभी भी रिकवरी का दौर जारी है और यह 6 डॉलर प्रति पाउंड के आसपास ट्रेड कर रहा है।
इस तेजी के बीच निवेशकों की रडार पर भारत की तीन प्रमुख कंपनियां हिंदुस्तान कॉपर, हिंडाल्को और वेदांता आ गई हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि भारत में तांबे की मांग अगले दो सालों तक हर साल 10 से 12 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगी, जो इन कंपनियों के लिए बड़े मौके लेकर आ सकती है।
सरकारी क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर की स्थिति बाजार में काफी मजबूत है क्योंकि यह देश की एकमात्र ‘वर्टिकली इंटीग्रेटेड’ उत्पादक है। इसका मतलब है कि यह कंपनी खनन से लेकर रिफाइनिंग तक का सारा काम खुद करती है। निवेशकों के लिए जो बात सबसे ज्यादा आकर्षक है, वह है कंपनी का भविष्य का प्लान। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को मौजूदा 3.54 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2031 तक 12.2 मिलियन टन करने की योजना पर काम कर रही है। इसके प्रमुख प्रोजेक्ट्स मालांजखंड और खेतड़ी में स्थित हैं।
ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) कंपनी के लिए शानदार रही है। सालाना आधार पर कंपनी का रेवेन्यू 109 फीसदी की छलांग लगाकर 687 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 328 करोड़ रुपये था। मुनाफे के मोर्चे पर भी कंपनी ने निराश नहीं किया और शुद्ध मुनाफा 147 फीसदी बढ़कर 156 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
आदित्य बिड़ला ग्रुप की दिग्गज कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जो कॉपर और एल्युमीनियम दोनों में दखल रखती है, ने भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। कंपनी की अमेरिकी सब्सिडियरी नोवेलिस ने कॉपर शिपमेंट में अच्छी बढ़ोतरी दिखाई है। हिंडाल्को का रेवेन्यू तीसरी तिमाही में 14 फीसदी बढ़कर 66,521 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, मुनाफे के मोर्चे पर निवेशकों को थोड़ा झटका लगा है, क्योंकि यह सालाना आधार पर 45 फीसदी गिरकर 2,049 करोड़ रुपये रह गया।
अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने शानदार प्रदर्शन किया है। वेदांता के कॉपर डिवीजन ने उत्पादन में तेजी दिखाई है और Q3FY26 में 45 किलो टन कैथोड का उत्पादन किया। वित्तीय नतीजों में वेदांता ने बाजी मार ली है। कंपनी का रेवेन्यू 37 फीसदी बढ़कर 23,369 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मुनाफे का रहा। वेदांता का शुद्ध मुनाफा 60 फीसदी की जोरदार बढ़त के साथ 7,807 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो तिमाही आधार पर भी 124 फीसदी की भारी वृद्धि दर्शाता है।
ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाला समय कॉपर सेक्टर के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती बिक्री तांबे की खपत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। हालांकि, चिंता का एक विषय यह है कि घरेलू उत्पादन अभी भी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिससे आयात पर निर्भरता बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर कॉपर कंसंट्रेट की कमी के कारण रिफाइनिंग चार्ज घटे हैं, जिससे स्मेल्टिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। लेकिन जिस तरह से देश में औद्योगीकरण और बिजलीकरण की रफ्तार तेज है, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में तांबे की चमक फीकी नहीं पड़ने वाली है।







