फिलिस्तीन के दूतावास के प्रभारी अबेद एलराज़ेक अबू जाज़ेर ने गुरुवार को कहा कि गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और मानवीय सहायता प्रदान करने में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दीर्घकालिक समाधान के लिए पहल करने का आग्रह किया। यह बयान इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष विराम समझौते के बाद आया है।
भारत और फिलिस्तीन के ऐतिहासिक संबंध अबू जाज़ेर ने भारत और फिलिस्तीन के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा, “हम भारत की भूमिका को बहुत सराहते हैं। भारत और फिलिस्तीन का रिश्ता आज़ादी से पहले से है। हम गाजा में भारतीय झंडा देखना चाहते हैं और भारत से मानवीय सहायता की उम्मीद करते हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी की सराहनाफिलिस्तीनी दूत ने प्रधानमंत्री मोदी को एक “समझदार नेता” बताते हुए उनकी पश्चिम एशिया में अच्छी पकड़ और संबंधों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के पास सभी नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं। हम उम्मीद करते हैं कि वह अपनी व्यक्तिगत भूमिका निभाएंगे ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम हो सके।”
संघर्ष विराम और मानवीय सहायताइजरायल और हमास के बीच संघर्ष विराम समझौते की घोषणा 19 जनवरी को की गई। समझौते के तहत चरणबद्ध तरीके से संघर्ष विराम, इस्राइली सेना की गाजा से वापसी और बंधकों की अदला-बदली शामिल है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते का स्वागत करते हुए बयान जारी किया, “हम गाजा में संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई के समझौते का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि इससे गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा।”
7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर हमले के बाद संघर्ष तेज हो गया था, जिसमें 1,200 से अधिक लोग मारे गए और 250 से अधिक बंधक बनाए गए। इसके जवाब में इजरायल ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की, जिससे गाजा में भारी जनहानि हुई। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 45,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें आधे से अधिक महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।संयुक्त राज्य अमेरिका, कतर, और मिस्र ने इस समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैश्विक स्तर पर इस समझौते का स्वागत किया गया है, और उम्मीद जताई गई है कि यह गाजा में लंबे समय तक शांति बनाए रखने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
भारत की भूमिका इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण हो सकती है, और फिलिस्तीनी दूत की यह अपील भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और बढ़ा सकती है।







