हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में “ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स ऑन स्कूल सेफ्टी एंड प्रिपरेशन ऑफ स्कूल डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यशाला के तीसरे एवं अंतिम दिन प्रतिभागियों के लिए विविध व्यावहारिक एवं प्रदर्शनात्मक सत्रों का आयोजन किया गया, जिनका उद्देश्य विद्यालयों में आपदा-पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया तथा सुरक्षित निकासी की व्यवहारिक समझ विकसित करना रहा।
दिन का प्रथम सत्र प्रातः 10:00 बजे से 11:45 बजे तक एसडीआरएफ टीम, नैनीताल के मनीष भाकुनी के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इस सत्र में प्रतिभागियों को फर्स्ट-एड, सर्च एंड रेस्क्यू तकनीकें, गोल्डन ऑवर की महत्ता, घायल व्यक्ति को सुरक्षित ढंग से ले जाने के तरीके, सीपीआर, डूबने की स्थिति में प्राथमिक उपचार तथा एफबीएओ (चोकिंग) से बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही विभिन्न रेस्क्यू उपकरणों का प्रदर्शन कर उनके उपयोग की विधियां समझाई गईं।
द्वितीय सत्र में एसडीआरएफ टीम द्वारा फील्ड डिमॉन्स्ट्रेशन कराया गया, जिसमें प्रतिभागियों को जिप लाइन के माध्यम से रिवर क्रॉसिंग तकनीक का अभ्यास कराया गया। विज्ञान भवन की छत से ग्राउंड तक जिप लाइन के जरिए सुरक्षित उतारकर मॉक ड्रिल कराई गई, जिससे प्रतिभागियों में आपदा की स्थिति में त्वरित एवं सुरक्षित निकासी की व्यवहारिक समझ विकसित हुई।
तृतीय सत्र में मुख्य अग्निशमन अधिकारी, नैनीताल श्री गौरव किरार ने अग्नि सुरक्षा एवं न्यूनीकरण पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यालयों में अग्निशमन यंत्रों की सही स्थापना, प्रवेश एवं निकास द्वारों की व्यवस्था, असेंबली प्वाइंट, अग्निशमन यंत्रों के प्रकार (डीसीपी, वाटर, सीओ₂) तथा आग की श्रेणियों (क्लास ए, बी, सी एवं डी) पर प्रकाश डाला।
इसके साथ ही एलपीजी सिलेंडर के सुरक्षित उपयोग, गैस रिसाव की स्थिति में सावधानियां, फायर ब्लैंकेट का प्रयोग, वनाग्नि की रोकथाम, फायर डिटेक्टर एवं फायर हाइड्रेंट प्रणाली की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया।
कार्यक्रम का समापन सत्र मुख्य अतिथि डॉ. महेश कुमार एवं प्रो. गिरिजा पांडे की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। समापन सत्र में संयोजक प्रो. पी. डी. पंत ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि सह-संयोजक डॉ. एच. सी. जोशी ने तीन दिवसीय कार्यशाला की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की।
इस अवसर पर 30 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव साझा करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी बताया।मुख्य अतिथि डॉ. महेश कुमार, संयुक्त निदेशक, डीआरएएसटीयूएओए, नैनीताल ने अपने संबोधन में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सतत प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
अंत में कार्यक्रम निदेशक डॉ. ओम प्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. बीना तिवारी फुलारा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक—प्रो. कमल देवलाल, डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. बीना तिवारी, डॉ. मीनाक्षी राणा, डॉ. राजेश मठपाल, डॉ. दीप्ति नेगी, डॉ. नेहा तिवारी, डॉ. खष्टी डसीला, डॉ. निर्मला तड़ागी एवं डॉ. प्रदीप कुमार पंत उपस्थित रहे।








