हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय शोध प्रगति समीक्षा कार्यशाला का आज दिनांक 19 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला के तीसरे एवं अंतिम दिन का प्रथम तकनीकी सत्र प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. शिवानंद कंवाई, पूर्व उपाध्यक्ष, Tata Consultancy Services द्वारा संचालित किया गया।
अपने व्याख्यान में डॉ. कंवाई ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की अवधारणा, उसके विकास क्रम तथा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में उसकी बढ़ती प्रासंगिकता पर विस्तृत एवं ज्ञानवर्धक चर्चा की। उन्होंने शोधार्थियों को बताया कि वर्तमान समय में एआई आधारित उपकरण शोध की गुणवत्ता, डेटा विश्लेषण, नवाचार एवं परिणामों की सटीकता को नई दिशा दे रहे हैं।
तीसरे दिन का द्वितीय तकनीकी सत्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विद्वान डॉ. रामेश्वर प्रसाद बहुगुणा द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने “विज्ञान क्या है और उसे वैज्ञानिक क्या बनाता है” विषय पर गहन एवं चिंतनपरक व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान पद्धति, तर्कशीलता तथा सत्यापन की प्रक्रिया को वैज्ञानिकता की मूल कसौटी बताया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में शोधार्थियों ने कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों एवं सीख को साझा करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया। निदेशक (शोध) द्वारा शोध की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए गए तथा शोधार्थियों को अनुसंधान में मौलिकता, नैतिकता एवं अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया गया।
कुलपति ने अपने संबोधन में शोधार्थियों को निर्देशित किया कि कार्यशाला से अर्जित ज्ञान एवं अनुभवों को आगामी छह माह की प्रगति समीक्षा कार्यशाला में प्रभावी रूप से लागू करें, ताकि विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता और उत्कृष्टता निरंतर सुदृढ़ हो सके।
इस अवसर पर विद्याशाखा के सभी निदेशक, सहायक निदेशक तथा उपनिदेशक (शोध) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक शोध निदेशक डॉ. एस. एन. ओझा द्वारा किया गया।
कार्यशाला के सफल आयोजन के साथ विश्वविद्यालय ने शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में गुणवत्ता उन्नयन की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया है।





