हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र ‘सीका’ (CIQA) द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत “सुशासन और ग्रामीण विकास” विषय पर एकल व्याख्यान संपन्न हुआ। व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. त्रिलोचन शास्त्री (पूर्व निदेशक अकादमिक, IIM बेंगलुरु) ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि ग्रामीण विकास लोकतंत्र के समावेशी स्वरूप से ही संभव है। नागरिक-केंद्रित विकास मॉडल अपनाने से ही सुशासन का वास्तविक रूप उभरता है। उन्होंने जोर दिया कि नीतियाँ केवल नियमों तक सीमित न रहें, बल्कि आम व्यवहार और अभ्यास का हिस्सा बनें—तभी सुशासन की सार्थकता सिद्ध होगी। कुलपति ने यह भी कहा कि प्रो. त्रिलोचन शास्त्री का व्याख्यान केवल बौद्धिक विमर्श नहीं, बल्कि प्रायोगिक अनुभवों से उपजा हुआ था।
अपने वक्तव्य में प्रो. त्रिलोचन शास्त्री ने सुशासन और ग्रामीण विकास को व्यक्ति के सामाजिक कर्तव्यों की जागरूकता से जोड़ते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं—विशेषकर चुनाव—में अनावश्यक खर्च कम होना चाहिए, अन्यथा ग्रामीण विकास के स्थान पर संसाधनों का दोहन बढ़ता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के “अमृतस्य पुत्र” उद्धरण का उल्लेख करते हुए नागरिक कर्तव्य-बोध पर बल दिया।
प्रो. शास्त्री ने संवादात्मक शैली में ग्रामीण समस्याओं, ग्रामीण समाज की संरचना और उसकी सीमाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण उद्योगों को तकनीक-संपन्न और अधिक प्रभावी बनाना होगा तथा भारतीय ग्रामीण उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ठोस प्रयास आवश्यक हैं। खेती और विकास तभी संभव है जब ग्रामीणों के लिए उपयुक्त व्यवसायिक अवसर सृजित हों। इसके लिए ग्रामीणों को संगठित करना, उन्हें जागरूक बनाना, व्यवसायिक नियमों की समझ विकसित करना और सामाजिक उन्नयन के आयामों को समझना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों को सेवा देने से अधिक आवश्यक है उन्हें कौशल (स्किल) प्रदान करना।
अंत में प्रो. शास्त्री ने कहा कि बाजार की जरूरतों के अनुरूप किसानों और ग्रामीण उत्पादों का विकास किया जाना चाहिए और सुशासन के लिए नागरिकों को अपने सामर्थ्य व कर्तव्यों की समझ विकसित करनी होगी।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत’सीक’ CIQA के निदेशक प्रो. गिरिजा पांडे ने किया। संचालन व धन्यवाद ज्ञापन प्रो. गगन सिंह ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की विभिन्न शिक्षा शाखाओं के निदेशक, शिक्षक एवं कार्मिक उपस्थित रहे।





