हल्द्वानी। उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी में पीएचडी शोधार्थियों की छह-मासिक प्रोग्रेस रिव्यू रिपोर्ट के संदर्भ में 17 से 19 फरवरी 2026 तक तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम दिन दिनांक 17 फरवरी 2026 में कुमाऊं यूनिवर्सिटी के शोध एवं नवाचार निदेशक डॉ. नंद गोपाल साहू, विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. एन.सी. लोहनी, शोध एवं नवाचार के निदेशक डॉ. गिरिजा प्रसाद पांडे तथा अकादमिक निदेशक डॉ. पी.डी. पंत विशेष रूप से उपस्थित रहे।
तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. नंद गोपाल साहू ने IPR जागरूकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोधार्थियों को बताया कि किसी भी शोध कार्य को प्रकाशित करने से पूर्व पेटेंट फाइल करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे शोध को कॉपी या पुनरुत्पादन से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और ट्रेड सीक्रेट्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डाला।
सत्र में शोध-पत्रों के वापस लिए जाने (पेपर रिट्रैक्शन) से लेखकों की विश्वसनीयता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की चर्चा की गई। साथ ही उन्होंने शोध प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को समझाते हुए बताया कि व्यवस्थित एवं नैतिक शोध समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यशाला में बड़ी संख्या में पीएचडी शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लेकर शोध के व्यावहारिक और नैतिक पहलुओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।





